Sunday, 10 July 2011

हताश 40 आदिवासी छात्राओं को मिली दिशा

 
भास्कर न्यूज
रांची. गरीबी और संघर्षो से जूझते हुए पिछले वर्ष कृपा, स्थेर, बेनार्दित, सोंगो जैसी 40 आदिवासी छात्राओं ने मैट्रिक की परीक्षा दी थी। परीक्षा परिणाम आया तो उन्हें निराशा हुई। पैसे इतने नहीं थे कि वे दुबारा फार्म भर सके।

मुरहू प्रखंड की इन छात्राओं के परिजनों ने स्पष्ट कह दिया कि पेट काट कर पढ़ाया, अब नहीं पढ़ा सकते। इन हताश छात्राओं की भेंट विकास भारती के शिक्षण संस्थान से जुड़े श्याम किशोर पाठक से हुई। उन्होंने कहा कि आप लोग हिम्मत न हारे, मैं आपको नि:शुल्क पढ़ाऊंगा। यह सुन छात्राएं भावुक हो उठीं। उनकी उम्मीदें जाग गई।

विकास भारती के कार्यकर्ता के सहयोग के आश्वासन के बाद छात्राओं ने भी पूरे मनोयोग से पढ़ाई करने की हामी भरी। इसके बाद श्यामकिशोर पाठक छात्राओं के परिजनों से भी मिले और उन्हें समझाया कि बेहतर भविष्य के लिए पढऩा जरूरी है।

पढ़ेंगी तभी तो जीवन में आगे बढ़ेंगी। परिजन मान गए। इसके बाद छात्राओं को विकास भारती के आवासीय कोचिंग में परीक्षा की तैयारी कराई जाने लगी। पांच अप्रैल से शुरू होनेवाली मैट्रिक की परीक्षा में पुन: छात्राएं शामिल होंगी।

और भी छात्राओं को मिलेगा सहयोग

इन छात्राओं के आवासीय कोचिंग के लिए टाटा कंपनी का आर्थिक सहयोग मिला है। यह सहयोग मिलता रहा तो कई छात्राओं का करियर बनेगा।
श्याम कुमार पाठक, को-ऑर्डिनेटर विकास भारती

पिताजी खेती करते हैं तो परिवार चलता है। जब मैं फेल हो गई थी तो लगा अब पढ़ाई खत्म। लेकिन इनका सहयोग मिला, अब पास होकर दिखाऊंगी।
रजनी टोपनो, छात्रा

घर में बहन और भाई हैं, उन्हें भी पढ़ाना था। आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोडऩे की नौबत आ गई थी।
अनिता कुमारी, छात्रा

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