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इस शिक्षा विभाग रणनीति बनाये और आप अपनी बातों को रखे यह जरी है.आपके दिनचर्या में शिक्षा सबसे ऊपर होना चाहिए.शिक्षा के बाद ही सब कुछ है.शिक्षा ही नहीं हो तो सरकार चाह कर भी कुछ नहीं कर सकती है. अप्रैल 2010 से शिक्षा का अधिकार जैसे कानून लागू हो गया है.अब सभी को पढ़ना है और शिक्षकों को पढ़ाना है.
उन्होंने कहा जो बच्चों को पढ़ने से रोकेगा, वह जेल की हवा खायेगा. उन्होंने आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि गुमला में 12598, लोहरदगा में 12827 व लातेहार में 2007 बच्चे विद्यालय से बारह है. विद्यालयों में मध्या: भोजन, साइकिल, छात्रवृत्ति दी जा रही है.जहां शिक्षक नहीं हैं, वहां पारा शिक्षकों से काम चलाया जा रहा है.स्कूल के विकास हेतु विद्यालय प्रबंधन समिति व ग्राम शिक्षा समिति बनाये गये हैं. विद्यालयों की निगरानी करना आपकी जिम्मेदारी है.
विकास भारती के सचिव अशोक भगत ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि आपसभी लोग पहली बार आये हैं. आपसे काफी अपेक्षा और उम्मीद है. पहले गांव के लोग स्कूल जाना नहीं चाहते हैं, लेकिन अब ऐसा बात नही है. अब काफी बदलाव आ गया है. अभिभावक अब अच्छे स्कूल में अपने बच्चों को शिक्षा देना चाहते हैं. शिक्षा पंचायत का विषय हो गया है फिर भी सरकारी स्कूलों की स्थिति बदलाव नहीं आया है. कहीं शिक्षक विद्यालय नहीं आते हैं तो कहीं ठीक ढंग से मिड डे मिल नहीं चलता है. इन सब विषयों पर आपका फोकस होना चाहिए जिससे सुधार हो सके.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए निदेशक प्राथमिक शिक्षा डीके सक्सेना ने भी शिक्षा से संबंधित बातों का जिक्र करते हुए कहा कि छह वर्ष से 15 वर्ष के बच्चों की सूची बनायें व देखे की कहां बच्चे पढ़ाई से छूट रहे हैं. गुमला, लोहरदगा व लातेहार से आये जनप्रतिनिधियों ने सुझाव व समस्याओं के संबंध में बारी बारी से अधिकारियों को अवगत कराया. कई प्रतिनिधियों ने कहा कि सबसे पहले अधिकारी अपने बच्चों को सरकारी विद्यालय में पढ़ायें, इससे विद्यालय का शिक्षा स्तर अपने आप दुरुस्त हो जायेगा.
शिक्षा विभाग के कोई पदाधिकारी अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ाते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि सरकारी विद्यालयों का क्या हाल है. जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों को अवगत कराते हुए कहा कि विद्यालयों में शिक्षक का ज्यादातर समय मध्या: भोजन व कार्यालय के क्रियाकलाप में ही गुजर जाता है.अभिभावक विद्यालय का निगरानी करें.
कार्यक्रम में निरासी पंचात की जनप्रतिनिधि कुंती देवी, विशुनपुर मुखिया रामप्रसाद बड़ाइक, प्रणव पाठक, शंभू कुमार सिंह, सुषमा केरकेट्टा सहित दर्जनों जनप्रतिनिधियों ने शिक्षा के संबंध में अपने विचारों को रखा. इस अवसर पर जिला परिषद अध्यक्ष सतवंती देवी, पंचायत समिति सदस्य हंदू भगत, जिला शिक्षा अधीक्षक जयंत कुमार मिश्रा, जिला शिक्षा पदाधिकारी का दास, ग्राम शिक्षा समिति सदस्य, विद्यालय प्रबंधन समिति के पदाधिकारी सहित जनप्रतिनिधि उपस्थित थे.

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