Sunday, 10 July 2011

Ranchi Express 22 February 2011 »

हस्तशिल्प मेला सह प्रदर्शनी का उद्धाटन, शिल्पकारों एवं कारीगरों के विकास के लिये कई योजनाएं : पाणिग्रही

रांची, केंद्र सरकार के हस्तशिल्प मंत्रालय झारखंड के सहायक निदेशक ए.के. पाणिग्रही ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के शिल्पकारों एवं कारीगरों की कला के विकास, विपणन एवं उत्पादन के लिये झारखंड राज्य में हस्तशिल्प एवं वस्त्र मंत्रालय द्वारा कई योजनाएं चलायी जा रही है। इसका उद्देश्य बाजार की आवश्यकतानुसार अच्छे किस्म के गुणवत्तापूर्ण सामान लोगों को उपलब्ध कराना है। झारखंड राज्य में प्रतिभावान शिल्पकारों एवं कारीगरों की कमी नहीं है। आवश्यकता है उनकी कला को उभारकर बाजार उपलब्ध कराने की। विकास भारती विशुनपुर तत्परता से इस कार्य में लगा है।
श्री पाणिग्रही विकास भारती विशुनपुर द्वारा 21 फरवरी से दो मार्च तक बिहार क्लब में आयोजित हस्तशिल्प मेला सह प्रदर्शनी का फीता काटकर उद्धाटन करने के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि योजनाएं चलाने के लिये विकास भारती को दायित्व दिया गया है। अंबेदकर हस्तशिल्प विकास योजना में झारखंड के 500 कारीगरों का स्वयं सहायता समूह बनाया गया है। कारीगरों को प्रशिक्षण दिलाकर प्रशिक्षित किया गया है। यह मूल्य आधारित एडिशन है। कारीगरों को आगे की प्रदर्शनी में मौका दिया जायेगा। कारीगरों की कला के विकास के लिये उनका उत्साहवर्ध्दन भी किया जा रहा है। श्री पाणिग्रही ने कहा कि झारखंड में 9000 कारीगरों को पहचान पत्र दिया गया है। 2010-11 में 5000 पहचान पत्र देने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि झारखंड में अंबेदकर हस्तशिल्प विकास योजना, शिल्पियों के लिये कल्याणकारी योजना, जनश्री बीमा योजना, राजीवगांधी हस्तशिल्प स्वास्थ्य बीमा योजना, राजीव गांधी हस्तशिल्प बीमा योजना सहित कारीगरों के लिये कई योजनाएं चलायी जा रही है।
नावार्ड के उपमहाप्रबंधक डा.के.सी. पाणिग्रही ने कहा कि नाबार्ड द्वारा हेंडलूम एवं ग्रामीण विकास के सभी कार्यक्रम चलाये जाते हैं। ग्रामीण उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत कारीगरों एवं हस्तशिल्पकारों को प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के बाद हैंडलूम एवं हैंडीक्राफ्ट का कार्य करने के लिये बैंक द्वारा ऋण की सुविधा उपलब्ध करायी जाती है। झारखंड में 10 हजार कारीगरों को प्रशिक्षित किया गया है। डा. पाणिग्रही ने कहा कि नाबार्ड द्वारा झारखंड में वर्ष 2009-10 में एक करोड़ 10 लाख रुपये एवं वर्ष 2010-11 में एक करोड़ 30 लाख रुपये निवेश किया गया है। उन्होंने कहा कि कारीगरों की सुविधा के लिये सभी प्रकार के कार्य किये जाते हैं। विकास भारती विशुनपुर के सचिव अशोक भगत ने कहा कि स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। ताकि स्वयं सहायता समूह के माध्यम से वे अधिक उत्पादन कर सके। श्री भगत ने कहा कि इस वर्ष 25 प्रदर्शनी लगाये गये हैं। इसके ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार हो रहा है तथा कारीगरों एवं हस्तशिल्पियों को विपणन के लिये एक मंच मिल रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय प्रदर्शनी सह बिक्री मेले का प्रायोजक एवं विकास भारती विशुनपुर आयोजक है। विकास भारती विशुनपुर के मीडिया संयोजक विनय ने बताया कि 10 दिवसीय प्रदर्शनी में 15 स्टाल होंगे।

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