Sunday, 10 July 2011

Ranchi Express 1 July 2011 »

हूल : अंग्रेजों के साथ लड़ा गया युध्द था, विद्रोह नहीं : शिवशंकर

रांची, हूल दिवस के अवसर पर विकास भारती, बिशुनपुर के राज्य स्तरीय कार्यालय में श्रध्दांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। सन् 1855 के संथाल हूल के महान शहीद सिध्दो-कान्हू, चान्द-भैरव के नेतृत्व में हजारों गुमनाम शहीदों की शहादत को स्मरण किया गया।
इस अवसर पर ट्राइबल स्टडी सेंटर, विकास भारती के निदेशक, शिवशंकर उरांव, जनशिक्षण संस्थान विकास भारतीय बिशुनपुर के फील्ड आफिसर बंधन हेम्ब्रोम (दीपू मुण्डा) एवं विकास इंस्टीट्यूट के निदेशक सुनील राय ने वीर शहीद द्वय की विकास भारती परिसर में अवस्थित प्रतिमा पर पुष्पार्पण किया। इस अवसर पर विकास भारती संचालित सभी परियोजनाओं के कार्यालीय कार्यकर्ता उपस्थित हुए और सिध्दो-कान्हु भाइयों की प्रतिमा पर पुष्पार्पण कर अन्य गुमनाम शहीदों को भी श्रध्दांजलि दी। उपस्थित कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए शिवशंकर उरांव ने बताया कि संताल हूल को इतिहासकारों और अंग्रेजों ने जानबूझकर ‘संताल विद्रोह’ का नाम दिया। लेकिन सच्चाई यह है कि यह झारखण्डी आदिवासियों और संतालों के द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ लड़ा गया युध्द था। इस युध्द में संताल परगना के संताल ही नहीं झारखण्ड के अन्य इलाकों के आदिवासी योध्दाओं ने भी भाग लिया था। झारखण्ड के आदिवासियों ने कभी भी अंग्रेजों की दास्ता और अंग्रेजी शासन को स्वीकार नहीं किया।
उन्होंने कहा संताल युध्द का परिणाम यह निकला कि दामिन-ई-कोड और संपूर्ण संताल परगना इलाके के लिए युध्द संधि के रूप में संताल परगना शिड्यूल डिस्ट्रिक्ट एक्ट और उनकी जमीन जायजात एवं परम्परा की सुरक्षा के लिए एस.पी.टी. एक्ट बना। इस युध्द का मूल कारण संतालों की अपनी शासन व्यवस्था मांझी परगनैत, जल, जंगल, जमीन और उनकी परम्पराओं पर अंग्रेजों के द्वारा छेड़छाड़ और उनपर अप्रतिम शोषण तथा अत्याचार करना था। झारखण्ड में अंग्रेजों ने आदिवासियों से पहले तो युध्द किया और जब वे कमजोर पड़े तो युध्द कर लिया। कोल्हान के ‘हो’ आदिवासियों के द्वारा अंग्रेजों के साथ लड़े गए युध्द के बाद 1831 में संधि के रूप में विल्किन्सन रूल बना। भगवान बिरसा मुण्डा के उलगुलान के परिणामस्वरूप ही संधि के रूप में सी.एन.टी. एक्ट, 1908 में बनाना पड़ा। आज का यह झारखण्ड उसी अबुआ राज की परिकल्पना और आह्वान का प्रतिफल है। इसलिए हमें ऐसे वीर शहीदों की शहादत को नमन करना चाहिए और उनसे प्रेणा लेनी चाहिए कि अन्याय और अत्याचार के साथ-साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना है। भ्रष्टाचार मुक्त झारखण्ड की स्थापना में अपनी महती भूमिका निभानी है। इस अवसर पर श्रीमती रंजना चौधरी (निदेशक, विस्तार परियोजना) शोभा पाण्डेय, दीपक शर्मा, विनय कुमार, उर्मिला पाण्डेय, अजीत सिन्हा, सुमीत प्रकाश, बसन्त ओहदार, सिध्दनाथ राय, पंकज राय, नुसरत परवीन, आरती कुमारी, तनुजा, नीतू सिन्हा, बिपिन उरांव, महेन्द्र छावड़ा, विजेन्द्र शर्मा आदि सभी कार्र्यकत्ता उपस्थित थे।

No comments:

Post a Comment